तलाश

दिन में रात की तलाश. रात में सुबह की तलाश. साथ में अकेलेपन की और अकेलेपन में साथ की तलाश. यही सिलसिला चलता रहा और मैं गोल गोल घूमता रहा.सफर पर जाता पर शाम को खुद को वहीं पाता. रास्ते बदले, साथ बदले, मँजिल बदली,पर हम नहीं बदले. कभी किस्मत को तो कभी खुद को दोषी ठहराया. बेचैनी बढ़ती गई और मैं ढूंढता रहा. जितना ढूंढा उतना खोया.लोग बढते गये मैं ठहरता  गया.अभी भी कुछ ढूंढ रहा हूँ पर किसी ने बताया है ये रास्ता मेरे अंदर से हो कर जाता है…

Life Goes on…

Today I was caught

Again by a random thoughts..

The thought was what if tomorrow,

You leave me alone, and say now cover the remaining journey on your own…

Then suddenly second thought in my mind plays..

Come on my friend come on what that thought says..

It’s life.. If allice goes then sallice will come.. Let’s don’t loose hope because life always goes on..

मोदी सरकार और बेचारे बैंक

मेरा नाम अभिषेक है मैं यू. पी के एक ग्रामीण पिछणे क्षेत्र में एक बैंक में कार्यरत हूं इस नाते प्रदेश और केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं से परिचित हूं। मेरे अनुभव के आधार पर मेरे कुछ सुझाव निम्नवत हैं-
. योजनाएं दमदार हैं पर क्रियान्वयन कमजोर है।
. क्रियान्वयन कमजोर क्यूँ है इसके बहुत से कारण है जिनके बारे में यहां चर्चा करना संभव नहीं।
. मुझे लगता है कि मुख्य बात मनोवृत्ति की है उदाहरण के तौर पर व्यक्ति का जनधन के अन्तर्गत खाता खोलकर मुद्रा योजना के अंतर्गत बिना सिक्योरिटी के लोन कर दिया गया और खाते में सब्सिडी भी आ जाती है पर वह व्यक्ति काम नहीं करता और लोन ङूब जाता है कमोबेश यही स्थिति सभी सरकारी योजनाओं की है। योजना का उद्देश्य सहायता देना था बैंक ने लोन देकर क्रियान्वयन भी किया पर परिणाम यह हुआ कि व्यक्ति कामचोर बन गया।
. बस यही जङ़ है तमाम सरकारी योजनाएं हमें आत्मनिर्भर की जगह कामचोर बना रही हैं यद्यपि उनका उद्देश्य आत्मनिर्भर बनाना था पर हमें मुफ्त का पैसा कामचोर बना रहा है। वजह वही है हमारी मनोवृत्ति।
. फिर इसका समाधान क्या है? समाधान बस एक है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा। एेसी शिक्षा जो हमें खुद्दार बनाए कामचोर नहीं।
. पर आज जब शिक्षक ही कामचोर आौर अधूरे हैं तो वे क्या शिक्षा गुणवत्तापूर्ण दे पाएंगे?
. समाधान पुनः एक है अपनी ताकत बस इसी एक विभाग को सुधारने में लगा दीजिए पूरा देश पूरी अर्थव्यवस्था अपने आप सुधर जाएगी।.
. निवेदन है कि आगे से गांवों में बैंक शाखाएं अवश्य खोलिए पर उससे पहले उससे पहले सुनिश्चित कीजिए वहाँ स्कूल आौर अस्पताल पहले खुलें। फिर सरकारी योजनाएं सफल हो जाएंगी। आपको वोट भी मिलेंगे और दुआएंभी।